समय के साथ-साथ कितनी यादें, कितने लोग याद नहीं रहते हैं पर एक माँ को अपना खोया
हुआ बेटा नहीं. थोड़ी सी भी आहट होने पर माँ शेरनी चौंक कर इधर-उधर देखने लगती थी. बड़ा बेटा राम शेरू बहुतेरी कोशिश में लगा रहता था माँ का मन फुसलाने में. वह तरह तरह
के करतब दिखाता. माँ सोचती कि श्याम भी ऐसे ही करतब करता था. खरगोश को भागते देखती
तो उसे लगता कि श्याम भी उसके पीछे दौड़ता हुआ अभी दिखेगा. पेड़-पौधे भी अब ज्यादातर
शांत और दुखी दीखते थे. अब शेरनी माँ शिकार राम के लिए और राम को सिखाने के लिए
करती. राम भी बिना किसी साथी या भाई के ज्यादा गंभीर और थोडा गुसैल होने लगा था. साल
बीतते-बीतते माँ शेरनी ने बिस्तर पकड लिया. पर राम अब गबरू जवान हो गया था. अब शिकार
वही करता और तबतक नहीं खाता जबतक माँ कुछ खा नहीं ले.
माँ शेरनी समय-समय पर राम को पथरीले जंगल और उसमें रहने वाले उन दो पैरों वाले
जानवरों के बारे में बताती रहती. वह बताती थी कि ये जानवर अपने आगे के दो पैरों से
क्या-क्या करते हैं; ये लोग अपना गंदा और कुरूप शरीर छिपाने के लिए रंगीन कपडे
पहनते हैं; ये लोग खाते कम, बर्बाद उससे ज्यादा और संग्रह सबसे ज्यादा करते हैं;
इनलोगों में मिलकर रहने और बांटकर खाने की आदत नहीं है और ये हमेशा आपस में लड़ते
रहते हैं. वह यह भी बताती कि शेर कभी अपने शिकार को बंदी नहीं बनाते और नाही
उन्हें संग्रह करके रखते हैं. वह यह भी बताती कि दस छोटे खगोश को मारकर पेट भरने
के बजाय एक उतना बड़ा ही शिकार करो जिससे हम सबका पेट भर जाए और थोडा छोटे मांसभक्षी
जानवरों और पक्षियों के लिए भी छोड़ देना चाहिए. माँ कभी-कभी बरगद के पेड़ पर चिपके
पैरासाइट दिखाया करती थी. वह कहती थी कि ये दो पैर वाले जानवर जो अपने को मनुष्य
कहते हैं इन पैरासाइट से कम नहीं हैं क्योंकि ये मनुष्य भी प्रकृति और प्राकृतिक
सम्पदा का उसी प्रकार शोषण करते हैं. माँ हमेशा राम को कहती थी कि वह हरदम अपने
छोटे भाई को इन दानवों के कैद से छुडाने की कोशिश में लगा रहे. अगर इच्छा-शक्ति
मजबूत होगी तो ईश्वर अवश्य एक अच्छा अवसर प्रदान करेंगे. एक रात जब राम शिकार कर
लौटा तो उसकी माँ बहुत खोजने पर पहाड़ी टीले पर पथरीले शहर के तरफ निहारती मृत
मिली.
शोक समारोह में जंगल के सभी पशु पक्षी सम्मलित हुए. मंत्री भालू के प्रस्ताव
और सेनापति हाथी के समर्थन पर सभी ने सर्व सम्मति से रामू शेर को अपना राजा घोषित
कर दिया. बंदरों की सेना ने दूर-दूर तक यथायुक्त ढिंढोरा पीट कर समाचार फैला दिया.
पक्षियों ने आसपास के अन्य जंगलों में जाकर वहां के समाचार-वाहकों को बतला दिया.
ऐसा बहुत आवश्यक होता है. इसके बाद किसी भी अन्य जंगलवासियों को सीमा उलंघन करने
का बहाना नहीं मिलता है. अन्यथा विदेशी अपना घर तो ठीक-ठाक रखते हैं और इधर
तोड़-फोड़, चोरी-डकैती करने आ जाते हैं.
रामू शेर को अपना राज्य भलिभांति रखने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. दिन में एक बार पूरे क्षेत्र का पैदल दौरा , खासकर उन जगहों पर जहां पक्षी ज्यादा शोर मचा रहे हों अथवा वहां जहां बिना किसी बात के लोग आपस में लड़ाई-झगड़ा कर रहे हों. कभी-कभी सीमा उलंघन होने पर चौकसी देखनी पड़ती थी और कुछ ज्यादा ताकत लगाकर दहाड़ना पड़ता था. रामू शेर एक प्रसन्नचित और बहादुर राजा था. मात्र उसे दो पैरों वाले मनुष्यों से घृणा थी और डर केवल आग की लपटों से लगता था. आग से तो सभी जानवर डरतें है.जानवरों के रोयें बड़ी जलती आग में जल जाते हैं और उन्हें आग बुझाना भी तो नहीं आता. देखते-देखते रामू शेर चार वर्ष का हो गया. वह किसी भी क्षण अपने भाई श्याम को नहीं भूला था.
रामू शेर को अपना राज्य भलिभांति रखने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. दिन में एक बार पूरे क्षेत्र का पैदल दौरा , खासकर उन जगहों पर जहां पक्षी ज्यादा शोर मचा रहे हों अथवा वहां जहां बिना किसी बात के लोग आपस में लड़ाई-झगड़ा कर रहे हों. कभी-कभी सीमा उलंघन होने पर चौकसी देखनी पड़ती थी और कुछ ज्यादा ताकत लगाकर दहाड़ना पड़ता था. रामू शेर एक प्रसन्नचित और बहादुर राजा था. मात्र उसे दो पैरों वाले मनुष्यों से घृणा थी और डर केवल आग की लपटों से लगता था. आग से तो सभी जानवर डरतें है.जानवरों के रोयें बड़ी जलती आग में जल जाते हैं और उन्हें आग बुझाना भी तो नहीं आता. देखते-देखते रामू शेर चार वर्ष का हो गया. वह किसी भी क्षण अपने भाई श्याम को नहीं भूला था.
To be continued…

